उत्तराखंड में छह नदियों का होगा पुनर्जीवन और संरक्षण
देहरादून (आरएनएस)। उत्तराखंड के छह जिलों की छह नदियों के पुनर्जीवन और संरक्षण के लिए 40.50 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दे दी गई है। यह स्वीकृति सचिवालय में शुक्रवार को आयोजित स्प्रिंग एंड रिवर रीजुविनेशन प्राधिकरण (सारा) की राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति की पांचवीं बैठक में दी गई। परियोजनाएं एक जिला–एक नदी योजना के अंतर्गत स्वीकृत की गई हैं।
बैठक की अध्यक्षता सचिव जलागम दिलीप जावलकर ने की। उन्होंने अधिकारियों से सभी प्रस्तावित योजनाओं की विस्तृत जानकारी लेते हुए निर्देश दिए कि धारा–नौला संवर्धन योजना के माध्यम से पारंपरिक जल स्रोतों और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने वैज्ञानिकों और अभियंताओं से कहा कि स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाते हुए वर्षा जल संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि नदियों को बारहमासी स्वरूप दिया जा सके।
बैठक में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी सारा कहकशां नसीम ने बताया कि चमोली जनपद की चंद्रभागा नदी के पुनर्जीवन के लिए 1.66 करोड़ रुपये की योजना पर कार्य पहले से जारी है। इसके अलावा ऊधमसिंह नगर और नैनीताल में भू-जल रिचार्ज से संबंधित कार्यों के लिए कुल बजट का लगभग 40 प्रतिशत आवंटित किया जा चुका है।
स्वीकृत योजनाओं के तहत देहरादून जिले में सौंग नदी की सहायक गडूल नदी के पुनर्जीवन पर 16.38 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उत्तरकाशी में कमल नदी के लिए 12.28 करोड़ रुपये, पिथौरागढ़ में पूर्वी रामगंगा नदी के संरक्षण के लिए 6.59 करोड़ रुपये और रुद्रप्रयाग में पुनाड़ नदी के विकास के लिए 4.87 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी गई है। चम्पावत जिले में गौड़ी नदी के संरक्षण कार्यों पर 2.42 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जबकि अल्मोड़ा जिले में जटा गंगा नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए 1.78 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत की गई है।
बैठक में उपनिदेशक डॉ. डी. एस. रावत, वित्त अधिकारी जलागम दीपक चंद्र भट्ट सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। संबंधित जिलों के अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से बैठक में जुड़े। सरकार का मानना है कि इन योजनाओं के क्रियान्वयन से न केवल नदियों का संरक्षण होगा, बल्कि जल स्रोतों के सुदृढ़ होने से स्थानीय लोगों को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।


