देहरादून (आरएनएस)। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत राज्य सरकार ने पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। “यू कोट वी पे” मॉडल के तहत चयनित विशेषज्ञ चिकित्सकों की विभिन्न जिलों में तैनाती को स्वीकृति दे दी गई है। लंबे समय से विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे इन क्षेत्रों के लिए यह निर्णय अहम माना जा रहा है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 03 दिसंबर 2025 को आयोजित साक्षात्कार के बाद एनेस्थेटिस्ट, प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ पदों पर चयनित चिकित्सकों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप जिला चिकित्सालयों में तैनात किया गया है। इन नियुक्तियों से मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ शल्य चिकित्सा और आपातकालीन उपचार सुविधाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एनेस्थेटिस्ट डॉक्टर आर. हेमचंद्रन, प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर देविका खत्री और बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अनंत गुप्ता को तैनात किया गया है। इससे क्षेत्र में सर्जरी, सुरक्षित प्रसव और नवजात शिशुओं के उपचार की सुविधाएं बेहतर होंगी।
चमोली जिले के गैरसैंण स्थित उप जिला चिकित्सालय में एनेस्थेटिस्ट डॉक्टर विशाल प्रताप सिंह और प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर शिल्पा भानुदास मुरकुटे को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे स्थानीय महिलाओं और गर्भवती माताओं को विशेषज्ञ सेवाओं के लिए अब दूर-दराज के अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
पौड़ी गढ़वाल जिले के बीरोंखाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ममता थपलियाल की तैनाती की गई है। वहीं पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर किशन सिंह महर सेवाएं देंगे।
सभी नियुक्तियां प्रारंभिक रूप से 11 माह की संविदा अवधि के लिए की गई हैं, जिन्हें कार्य निष्पादन के मूल्यांकन के आधार पर आगे बढ़ाया जा सकता है। चयनित चिकित्सकों को निर्धारित समयावधि में संबंधित मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस संबंध में स्वास्थ्य सचिव डॉक्टर आर. राजेश कुमार ने कहा कि सरकार का प्राथमिक उद्देश्य यह है कि पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को भी स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। उन्होंने कहा कि इन तैनातियों से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आने के साथ-साथ आपातकालीन और रेफरल सेवाओं पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
स्वास्थ्य सचिव ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्य में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की जाएगी। इन तैनातियों से दूरस्थ इलाकों में लंबे समय से चली आ रही विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा, जिससे आम जनता को बेहतर, सुलभ और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।


