देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की शुरुआत महाराष्ट्र में हुए विमान हादसे में दिवंगत लोगों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर की गई। इसके बाद कैबिनेट ने कुल आठ प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की। बैठक का प्रमुख निर्णय उत्तराखंड ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2026 को मंजूरी देना रहा। कैबिनेट के फैसले स्वास्थ्य, राजस्व, जनजाति कल्याण, भू-जल संरक्षण, उच्च शिक्षा, रक्षा, औद्योगिक विकास और हरित ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों से जुड़े रहे।
मंत्रिमंडल ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के ऐसे स्वास्थ्य कार्यकर्ता और स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों को, जिन्होंने अपने मूल संवर्ग में न्यूनतम पांच वर्ष की संतोषजनक सेवा पूर्ण कर ली है, पूरे सेवाकाल में एक बार आपसी सहमति के आधार पर जनपद परिवर्तन की अनुमति देने का निर्णय लिया। इससे लंबे समय से स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे कर्मियों को राहत मिलेगी।
राज्य में परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण फैसला किया। लघु, मध्यम और वृहद परियोजनाओं के लिए भू-स्वामियों से आपसी समझौते के आधार पर भूमि प्राप्त करने की प्रक्रिया तय की गई है। इसका उद्देश्य भूमि अधिग्रहण में लगने वाले लंबे समय और कानूनी विवादों को कम करना है, जिससे जनहित की परियोजनाओं की लागत भी घट सके।
जनपद उधम सिंह नगर स्थित प्राग फार्म की 1354.14 एकड़ भूमि को औद्योगिक आस्थान के रूप में विकसित करने के लिए सिडकुल को हस्तांतरित किए जाने संबंधी शासनादेश में संशोधन को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत औद्योगिक विकास विभाग और राजस्व विभाग की सहमति से पट्टे पर दी गई भूमि को समान प्रयोजन के लिए उप पट्टे पर देने का अधिकार सिडकुल को मिलेगा।
जनजाति बहुल जनपदों में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभागीय ढांचे के पुनर्गठन का निर्णय लिया गया। देहरादून, चमोली, उधम सिंह नगर और पिथौरागढ़ में जिला जनजाति कल्याण अधिकारियों के पदों को सेवा नियमावली में सम्मिलित करने के लिए उत्तराखंड जनजाति कल्याण राजपत्रित अधिकारी सेवा संशोधन नियमावली 2025 को प्रख्यापित करने पर सहमति दी गई।
कैबिनेट ने गैर कृषि उपयोग के लिए भू-जल निकासी पर जल मूल्य और प्रभार की दरें लागू करने का भी निर्णय लिया। यह व्यवस्था उद्योगों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, रेजीडेंशियल अपार्टमेंट, होटल, वॉटर पार्क, वाहन धुलाई केंद्र और स्विमिंग पूल जैसे उपयोगों पर लागू होगी। इसका उद्देश्य भू-जल के अनियंत्रित दोहन को रोकना और जल संसाधनों का संरक्षण करना है।
राज्य को शिक्षा हब के रूप में विकसित करने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए देहरादून में जीआरडी उत्तराखंड विश्वविद्यालय के रूप में एक निजी विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दी गई। यह विश्वविद्यालय नवाचार आधारित शिक्षा, शोध को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर सृजित करने पर केंद्रित रहेगा।
रक्षा और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्णय के तहत उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड़ और चमोली के गौचर हवाई पट्टियों को संयुक्त नागरिक और सैन्य उपयोग के लिए एडवांस लैंडिंग ग्राउंड के रूप में रक्षा मंत्रालय को लीज पर हस्तांतरित करने पर सहमति दी गई।
बैठक में उत्तराखंड ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2026 को भी मंजूरी प्रदान की गई। सरकार का मानना है कि राज्य में उपलब्ध जल विद्युत जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर हरित हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और जलवायु परिवर्तन से निपटने में राज्य की भूमिका मजबूत होगी। नीति के माध्यम से उत्तराखंड को स्वच्छ और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।


