देहरादून (आरएनएस)। उत्तराखंड के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में अब युवाओं को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने की दिशा में नई पहल शुरू हो गई है। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान निरंजनपुर, देहरादून से राज्य के 13 आईटीआई संस्थानों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन और टाटा ऐस से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की शुरुआत की गई। इस अवसर पर कौशल विकास एवं सेवायोजन, पशुपालन, दुग्ध विकास, मत्स्य पालन, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग तथा प्रोटोकॉल मंत्री सौरभ बहुगुणा मौजूद रहे।
इस पहल का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को रोजगारोन्मुखी बनाना और उन्हें आधुनिक तकनीकों में दक्ष करना है। राज्य सरकार ने उद्योग जगत के साथ 17 फरवरी 2025 को हुए समझौते के तहत यह निर्णय लिया था कि आईटीआई संस्थानों में अत्याधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अंतर्गत आठ दीर्घ अवधि के पाठ्यक्रम एक से दो वर्ष की अवधि के होंगे, जबकि 23 लघु अवधि के प्रशिक्षण कार्यक्रम 270 से 390 घंटे के बीच संचालित किए जाएंगे।
दीर्घ अवधि के पाठ्यक्रमों में मैकेनिक इलेक्ट्रिक वाहन, उन्नत सीएनसी मशीनिंग, औद्योगिक रोबोटिक्स एवं डिजिटल विनिर्माण, बेसिक डिजाइनर एवं वर्चुअल वेरिफायर, विनिर्माण प्रक्रिया नियंत्रण एवं स्वचालन, उन्नत उपकरणों का उपयोग करने वाला शिल्पकार, कम्प्यूटर सहायतित विनिर्माण प्रोग्रामर तथा औद्योगिक इंटरनेट ऑफ थिंग्स तकनीशियन जैसे विषय शामिल हैं।
प्रशिक्षण सुविधाओं को मजबूत करने के लिए नाबार्ड के सहयोग से प्रत्येक चयनित आईटीआई में लगभग 10 हजार वर्ग फुट क्षेत्रफल की आधुनिक कार्यशालाओं का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए कुल 79.09 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। प्रथम चरण में सितारगंज, हल्द्वानी, काशीपुर, हरिद्वार, पिरानकलियर, देहरादून और बड़कोट स्थित आईटीआई संस्थानों में निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इन संस्थानों में टाटा टेक्नोलॉजी की ओर से उपकरणों की आपूर्ति कर दी गई है और इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया जारी है।
प्रशिक्षण के संचालन के लिए टाटा टेक्नोलॉजी पहले दो वर्षों तक प्रत्येक संस्थान में दो प्रशिक्षक और तीसरे वर्ष एक प्रशिक्षक उपलब्ध कराएगी। कार्यक्रम के दौरान विभागीय अधिकारियों के साथ टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड के उत्तर भारत प्रमुख रणधीर सिंह और अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
सरकार का मानना है कि इस पहल से उत्तराखंड के युवा इलेक्ट्रिक वाहन, रोबोटिक्स, स्वचालन और डिजिटल विनिर्माण जैसी उभरती तकनीकों में दक्ष होकर रोजगार के नए अवसर प्राप्त कर सकेंगे और राज्य के औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी।


